~* आशा *~

This poem is dedicated to "Aasha", a mentally challenged girl child, who was raped number of times by some 'humo-devils'. She is currently in custody of a local NGO and loves painting.



दर्द की आहटों को सुनते क्यों ना हो? सुन लिया ना अब , कुछ कहते क्यों ना हो? उसकी आँखों में देखो, बातें करो जरा , कुछ पूछती हैं ना, जवाब देते क्यों  ना हो? ऊपर कि अदालत में जाना है एक दिन? इन्साफ होगा ना, तो डरते क्यों  ना  हो? खुद को बनारसी कहते हो , बनारस तो एक एहसास है, महसूस करते क्यों ना  हो? क्या माखौल कम उड़ाया ज़िन्दगी ने उसका ? बहुत हुआ ना, तो चुप रहते क्यों ना हो?

"ज़िंदा लाश बना डाला , तुम सभी ने उसको , फिर भी नाम पूछो तो 'आशा 'बताती है"


#Shivam #Hindi #Aasha

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