जिंदगी रुकी कुछ देर, फिर चलने लगी!

उल्फतों के भंवर में शाख से पत्ता टूट गया,

ज़िन्दगी रुकी कुछ देर , फिर चलने लगी।



क्यों, क्यों नहीं के चक्कर में ,

साकी भी मुझसे रूठ गया,जो ना था मेरा,

पाने में उसको, मेरा मुझसे ही छूट गया . 


दरअसल, ज़िन्दगी कभी रुकी ही नहीं ,

मैं ही था जो बात-बात पर ठहर गया!


Urdu- क़ासिदे-ए-हयात (Messenger of life) बनके तुम आये ना होते तो अच्छा था, 

नशेमन (Nest) के ख्वाब मिलके सजाये ना होते तो अच्छा था. 

हमारी क़ुरबत(Closeness) को फितूर (Obsession) ना बना लेता तो अच्छा था,

पशबन (Guard) बनके तेरा , आशना(Companion) न समझ लेता तो अच्छा था. 

अच्छा हुआ जो तूने ख्वाबेदा(Dreamy) ज़िन्दगी को फ़ना(Destroy) कर दिया, 

नदामत(Regret) ये रह गयी कि , इतल्लाह(Inform) कर दिया होता तो अच्छा था!

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