मां आवारा हुई और मर गयी



कहने को तो माँ के पर्यायवाची में वतन से लेकर खुदा तक सभी आ जाते हैं। फिल्मों के शुरुवात से लेकर, हर एक ठोस कसम की जरुरत है माँ, लेकिन वही माँ आवारा भी हुई और मर भी गयी।

अब माँ को आवारा कह भर देने से यह न हो की विकास लविंग पीपल मुझे एंटी-नेशनल या एंटी-हिन्दू कह दें इसलिए ये बताता चलूँ की 'आवारा माँ' के कांसेप्ट पे मेरा कोई कॉपीराइट नहीं है. यह तो वो नाम है जो वहां की सरकार ने गौशालाओं में रहने वाली हज़ारों गायों को दिया है।

हिंगोनिया राजस्थान में है और वहॉं पता चला की २ हफ़्तों में 500 से ज्यादा गायें मर गयी. अच्छा मैंने कभी नहीं देखा की किसी गाय की चिता जालयी गयी हो या फिर सूअर का जनाजा निकला हो , हाँ केवल सेक्युलर मुर्गे को देखा है जन्नत या स्वर्ग जाते हुए।

गायें गौशाला में थीं , एक महारानी की रियासत में थीं, लेकिन रानी-साहिबा 'ललित-कलाओं' में इतनी व्यस्त थीं की आवारा गायों के लिए वक़्त न निकाल पायीं।

पता चला की गायों ने २ हफ्ते से चारा नहीं खाया था क्यूंकि मिला ही नहीं, कुछ तो अभी भी ज़िंदा हैं।

ताज्जुब की बात है की बिचारि इतना दिन चल कैसे गयीं, कहीं दिल्ली में होतीं तो लोग आज का गाँधी बोल के लोग 'अण्णा-अण्णा' चिल्लाते। कुछ तो गवर्नर या फिर चीफ मिनिस्टर तक बन गयी होतीं , लेकिन शायद नहीं बन पातीं क्यूंकि गाय तो सीधी और सरल जानवर होती है, और फिर वो ठहरी बिचारि गाय , अपने 'मन की बात' भी कैसे करती? मुश्किल से 100 फॉलोवर बना पाती।

खैर, खबर तो यही है की 'मां आवारा हुई और मर गयी'।  


#ShivamSingh #Cows

CULT ALTERED © 2018

  • Black Facebook Icon
  • Black Instagram Icon

Proudly created by Panocraft

  • Cult Altered